आरज़ू यही है मेरा.

ऐ मीत मेरे ,तुम गये कहाॅ , मेरा दिल तुझे ढ़ूॅढ रहा है। बेताबी से हर ओर तुझे, अपलक खोज रहा है।। क्यों छिप-छिपकर हरदम मुझको, रहते सदा रूलाते । मिलती आहट कभी तुम्हारी ,पर घिसक वहाॅसे जाते।। दौड़-भाग जीवन भर थक गये,अबतक नहीं मिले हो। दौड़ाओगे कबतक कितना ,तुम ही बतला सकते हो ।। […]

आरज़ू यही है मेरा.

samratjitendrasingh द्वारा प्रकाशित

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